विजय कर विजय कर!
विपत्ति से किंचित न डर
कठिन घड़ी है आ पड़ी
मृत्यु नर्तन कर रही
उठा भुजा संकल्प कर
साहस से इक हुंकार भर
विजय कर विजय कर!
हृदय का आत्मबल बढा
मन में इक संकल्प कर
दिशा दिशा उज्ज्वल बने
तिमिर में तू प्रकाश भर
विजय कर विजय कर!
क्लांति भय को टाल कर
शुचि संस्कार याद कर
मृत्यु का तांडव टले
विजय का शंखनाद कर
विजय कर विजय कर
विपत्ति से किंचित न डर!
एकता उपाध्याय (गोरखपुर)
विपत्ति से न डर
Ekta Gorakhpuri
(C) All Rights Reserved. Poem Submitted on 05/27/2020
(1)
Poem topics: , Print This Poem , Rhyme Scheme
About विपत्ति से न डर
विपत्ति से न डर is a poem by Ekta Gorakhpuri. This page includes the poem text, poet information, related topics, comments, and similar poems.
Write your comment about विपत्ति से न डर poem by Ekta Gorakhpuri
Best Poems of Ekta Gorakhpuri