ईश्वर की अनुपम, अद्भुत कृति।
हे सावित्री ! सीता ! हे सती !!
हो रानी लक्ष्मीबाई तुम ।
काली बनकर के आयीं तुम ।।
परहित करने वाली देवी ।
वीरों जैसी , काली देवी ।।
दुष्टों के नाश हेतु आयीं ।
तुम चिरसजीव तुम स्थायी।।
प्रेम तुम्हारा जीवित है ।
ना सीमित अरे असीमित है ।।
प्रेयसी हो तुम , संसार कहे ।
अबला नारी प्रतिकार सहे ।।
है प्रेम तुम्हारा मातृ रूप ।
शक्ति तुम में, ज्यों कोटि भूप ।।
जब प्रेयसी हो , तुम शान्त नदी ।
यदि भूप बनी हिल जाये सदी ।।
नारी ही राष्ट्र विधाता है ।
वो सब जन की सुखदाता है ।।
माता ही दिशा पुत्र को दे ।
फिर पुत्र राष्ट्र निर्माण करे ।।
नारी ने सभी सुधार दिये ।
अति मूढ़ पुरुष भी तार दिये ।।
'तुलसी' इसके प्रत्यक्ष प्रमाण ।
उनको , पत्नी ने दिया ज्ञान ।।
नारी का यौवन सुन्दरतम ।
उससे भी सुन्दर उसका मन ।।
हैं दया , शील और क्षमादान ।
ये नारी में हैं विधमान ।।
— सूर्य प्रकाश शर्मा
नारी के प्रति
Surya Prakash Sharma
(C) All Rights Reserved. Poem Submitted on 05/20/2023
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