रात का फ़रमान है......
सबका बस एक यही अरमान है
महबूब का हाथों में हाथ हो
सुकून का वो पल और
कंधे पे उसके सर हो
उम्र भर का साथ हों
गम हो या खुशी
मिलकर गुजर जाएं ये ज़िंदगी
तेरा नाम मेरे नाम के साथ जुड़ जाए
तू मेरी मंज़िल,तू ही मेरा रास्ता
तू मेरा आख़िरी सफर हो जाए
बस तुझसे ही हो मेरा वास्ता
हर दर्द सह लेंगे जब साथ तेरे जैसा हमसफ़र मिल जाए
बस इतनी सी बात हो
उम्र भर का साथ हो
और मिल कर ज़िंदगी यूंही गुजर जाएं!!
@poet.sonam
रात का फ़रमान है..!!❣️
Sonam Sharma
(C) All Rights Reserved. Poem Submitted on 07/13/2021
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