बदल रहा है समय,
बदल रहा है दौर,
यह सदी में शुरू हुई है एक नई पारी,
अबला नहीं सबला है नारी।
मां हो, बहन हो, बेटी हो,
जो भी रूप में होती हो,
हर रूप में हम तुम्हारे हैं आभारी,
अबला नहीं सबला है नारी।
अंतरिक्ष से लेकर धरती तक,
हर जगह अपनी छाप छोड़ी है,
हर काम में पुरुषों पर अब पड़ती है भारी,
अबला नहीं सबला है नारी।
वह देश की पहली अफसर थी,
किरण बेदी है नाम उसका,
जिसने दिखाई थी नारी की असली शक्ति,
प्रधानमंत्री तक की उठवा दी थी गाड़ी,
अबला नहीं सबला है नारी।
हर चुनौती से सरलता से निपटती है,
चुनौती हार जाए,
मगर यह कभी ना हारी,
अबला नहीं सबला है नारी।
अबला नहीं सबला है नारी। (a Woman Is Not Weak)
Rishabh Chawla
(C) All Rights Reserved. Poem Submitted on 06/20/2020
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