Nir Baghwar Poems

  • 1.  
    मैं नहीं जानता इश्क़ क्या है
    मैं नहीं जानता इश्क़ क्या है
    अगर तेरे कांधे पे सर रख तारों के बीच खुद को देखूं भी ना
    तो मैं नहीं जानता इश्क़ क्या है
    ...
  • 2.  
    ढलती शाम के उस सूरज तले
    आज भी जब उन सीढ़ियों पे बैठता हूं मैं
    तेरा वो साथ होना याद आता है

    ...
  • 3.  
    थी एक लड़की दीवानी सी
    एक लड़के पे वो मरती थी
    हंसते रोते दिल की अपनी
    सारी बातें उससे कहती थी
    ...
Total 3 poems written by poet Nir Baghwar


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Poem of the day

Andrew Lang Poem
Melville And Coghill - The Place Of The Little Hand
 by Andrew Lang

DEAD, with their eyes to the foe,
Dead, with the foe at their feet;
Under the sky laid low
Truly their slumber is sweet,
Though the wind from the Camp of the
Slain Men blow,
And the rain on the wilderness beat.

...

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