मैंने इज़ाद किया है
अपने युग की पीढ़ी के लिए
एक नया मुहावरा –
'रोबोट युगीन पीढ़ी' ।
जिसका हृदय है
बिल्कुल रोबोट जैसा —
संवेदनहीन ।
जिसे नहीं पड़ता है फर्क
किसी की चीख से
या किसी दुःख से ।
उसके आँखों के सामने
मरते रहें लोग
लेकिन वो रहता है सुख से ।
रोबोट युगीन मनुष्य
एक ऐसा मुहावरा है
जो सटीक बैठता है
उन लोगों के लिए
जो किसी बलात्कारी को
पहनाते हैं फूल माला ।
और किसी हत्यारे के नाम के
जयकारे लगाते हैं ।
ऐसे लोग झिझकते नहीं हैं
अपनी माँ, अपने बाप
अपने देश, अपने धर्म
को गालियाँ बकने में ।
मैंने उन जगहों पर ऐसे लोगों को देखा है
जिस स्थान को देश का
भविष्य कहा जाता है ।
सबसे ज्यादा असर है उन पर
वे धैर्य हीन हो चुके हैं ।
मैं ऐसा भी मानता हूँ
कि अगली पीढ़ी में
रोबोट के गुण और अधिक होंगे
और ऐसे ही इंसानियत ख़त्म होती जाएगी ।।
— सूर्या
रोबोट युगीन पीढ़ी
Surya Prakash Sharma
(C) All Rights Reserved. Poem Submitted on 12/26/2023
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