दूर है हम आपसे तो कोई गम नहीं,
दूर रह कर आपको भुलाने वाले हम नहीं,
मुलाक़ात नहीं हुई तो क्या हुआ?
तेरी यादें किसी मुलाक़ात से कम तो नहीं |
तेरा यार हूँ मैं,तेरा अधूरा प्यार हूँ मैं,
तेरी मेरी प्रेम कहानी का एक महत्वपूर्ण किरदार हूँ मैं ,
शायद तुझे मालूम नहीं ऐ-दोस्त ,
तेरी यादों का इकलौता हकदार हूँ मैं |
क्या करूँ तेरी यादों बयाँ मैं ,
जब भी आती हैं तेरा दीदार करा जाती हैं ,
तू हो या ना हो पास, मेरे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता ,
मेरे लिए तो सिर्फ तेरी यादें ही काफ़ी हैं |
सुन ले मुझे अब ना तेरा प्यारा चाहिए,
ना ही तेरे जैसा यार चाहिए ,
हाँ बिताया था तेर साथ कुछ वक़्त ,
उस वक़्त की कुछ खूबसूरत यादें,
अाज भी मेरे जहन में ताजा हैं,
जी लूँगा मैं ताउम्र तेरी इन यादों केे सहारे,
मगर ना अब फिर से दरिया-ऐ-इश्क़ में गोता लगाने का,
मेरा कोई इरादा हैं |
तुम्हारी यादें
Murari Lal
(C) All Rights Reserved. Poem Submitted on 05/30/2019
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