जलेबी बनाओ रे
जलेबी बनाओ
मेरी चीनी तेरा घी
घोल चाशनी गाढ़ी सी
जलेबी बनाओ रे
जलेबी बनाओ
भट्टी हो या सिगड़ी हो
ख़ूब कड़ाही तगड़ी हो
दिन बोले तो समझो रात
हलवाई की समझो बात
जलेबी बनाओ रे
जलेबी बनाओ
खट्टी हो या मीठी हो
कड़वी हो या फीकी हो
टेढ़ी हो या सीधी हो
आड़ी हो या तिरछी हो
जलेबी बनाओ रे
जलेबी बनाओ
पीली हो या नीली हो
सूखी हो या गीली हो
पीनी है ना खानी है
हमको सिर्फ़ बनानी है
जलेबी बनाओ रे
जलेबी बनाओ
जलेबी बनाओ रे !
C K Rawat
(C) All Rights Reserved. Poem Submitted on 10/01/2019
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