तेरे ख्वाबों के सहारे ,
चलती कश्ती ये किनारे ,
ऊपर से दरिया का पानी बेहिसाब ।
अब तो मंजिल तुझको पाना ,
तेरी चाहत में खो जाना ,
अफ़साना कहती है दिल की ये किताब ।
तेरे ख्वाबों के सहारे ,
चलती कश्ती ये किनारे ,
ऊपर से दरिया का पानी बेहिसाब ।
तेरा रूठना और मनाना,
कर देगा मुझको मनमाना ,
जुगनू बन लूटेंगे हम भी आफ़ताब ।
शाकी बन समझाने आजा ,
दिल का दर्द मिटाने आजा ।
झड़ते मोती आँखों के देखे एक ख़्वाब ।
तेरे ख्वाबों के सहारे ,
चलती कश्ती ये किनारे ,
ऊपर से दरिया का पानी बेहिसाब ।
तेरी यादों से दिन कटते ,
हम भी मस्त मगन हैं रहते ,
जाएंगे भी तो हम जाएंगे कहाँ ।
तू ही राही तू ही मंजिल ।
तेरी आँखे जैसे ऊर्मिल ।
इनमें डूबे तो पाएंगे आसमां ।
तेरे ख्वाबों के सहारे ,
चलती कश्ती ये किनारे ,
ऊपर से दरिया का पानी बेहिसाब ।
तेरे ख्वाबों के सहारे
Dhirendra Panchal
(C) All Rights Reserved. Poem Submitted on 01/21/2022
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