दरिया वरिया मैं क्या जानू मेरा इश्क़ समंदर है ।
तेरा इश्क़ तो तू ही जाने मेरा इश्क़ सिकंदर है ।

तेरा तूने कह ना पाया मैंने अपना बोल दिया
तेरा तू परिभाषित कर दे मेरा वाला शंकर है ।

तेरा जिसको जितना आया समझ में उतना काफ़ी है
मेरा वाला काफ़ी कैसे हर पत्थर हर कंकर है ।

तेरा वाला जैसे कोई चोर चुराया सोना है
मेरा वाला हर मंदिर हर गुरुद्वारे के अंदर है ।

तेरा वाला लगता है कि जैसे कोई रेत का घर
मेरा वाला कालखंड का सबसे बड़ा मुकद्दर है ।

तेरा वाला गिनती में है प्रिये परन्तु सुन तो लो
मेरा वाला शून्य में बैठा बस इतना सा अंतर है ।

तेरा तू परिभाषित कर दे मेरा वाला शंकर है ।

~ धीरेन्द्र पांचाल