जिदंगी तुझे कौन समझ पाया है?
खुशियो में अगर रोये हैं तो दर्द मे मुस्काया है..

कुछ अपनों में पराए तो
परायो में अपनों को पाया है,,,

कुछ खवाबों को सपनों मे पूरा होते देखा है पर,, हकीकत में उम्मीदों को टूटता हुआ पाया हैं,,,

जिदंगी तुझे कौन समझ पाया है?
सच्चाई से रिश्ते टूटते देखें हैं पर,,
झूठ हमेशा काम आया है...!

कुछ लोगो को रिश्ते निभाते देखा है पर कुछ लोगों से सिर्फ धोखा खाया है...!

जिदंगी तेरा तो कुछ पलों का साथ है
अरे! खुश तो वो है जिसे मौत ने अपनाया है...!

जिदंगी तुझे कौन समझ पाया है
जितनी कोशिश की तुझे समझने की तूने मुझे उतना ही उलझाया हैं....!