internetPoem.com Login

खेल

C.K. Rawat

वक़्त का खेल है समझिएगा
लड़खड़ा जाइएगा बचिएगा

इक क़दम फूल इक क़दम काँटे
होशियारी से पाँव रखिएगा

काँच का फ़र्श मोम की छत है
दिल में बा-एहतियात रहिएगा

उनसे वादा वफ़ा नहीं होगा
मत ग़लत-फ़हमी पाल रखिएगा

आप में इक अथाह सागर है
सतह पर ही न बहते रहिएगा

-चन्द्रकान्त

(C) C.k. Rawat
07/24/2026


Best Poems of C.K. Rawat