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जंग

C.K. Rawat

ज़ोर से सुलझा नहीं मसला कभी
जंग से कुछ हल नहीं निकला कभी

लड़खड़ाया जो अंधेरी राह में
वो यक़ीनन फिर नहीं संभला कभी

घर से जो बाहर न था निकला कभी
लौट के आया न वो पगला कभी

वक़्त ने सीनों पे पत्थर रख दिए
फिर किसी का दिल नहीं पिघला कभी

था कहाँ जाना कहाँ हम आ गए
रास्तों ने भेस यूँ बदला कभी

(C) C.k. Rawat
06/02/2019


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