इश्क़ का रंग
एक तो उसके गोरे-गोरे गाल ।
ऊपर से उन पर वो लाल गुलाल-
जब लगाया गया ,
मत पूछिये क्या हुआ हमारे दिल का हाल ।
दिखने में तो वो वैसे ही है कमाल ।
लेकिन उस दिन माशाल्लाह बवाल ।
बड़ा खुशनसीब है वो गुलाल ,
जो चूम आया उसके गाल ।
उसकी नज़रें मायाजाल ।
हो गया हूँ बेहाल ।
बहरहाल ।
इश्क़ के रंग में डूबा हुआ है -
होली का त्योहार इस साल ।।
— सूर्या
Surya Prakash Sharma
(C) All Rights Reserved. Poem Submitted on 03/06/2023
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