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बारिश

Sushree Sangita Swain

ये बारिश जब अति हे
सौंधी सौंधी महक मिट्टी की
मन को भाजति हे
चाये के चुस्की के साथ
गिरती बूंदों को निहारने मैं
कितना मज़ा आता हे सावन के महीने मैं
ये रिमझिम बूंदे तन को भिगोये जाते हैँ
मस्त मगन होकर मोर भी नृत्य मैं लीन होजाता हे
दूर कहीं जैसे कोई मेघ मल्हार सुनाता हे
ये बारिश तो दिल मैं अगन लगाती हे
रह रह कर प्रियतम की याद दिलाती हे
प्यासी धरती की प्यास बुझाने
आती हे बारिश हमें भिगोने


(C) Sushree Sangita Swain
05/15/2020


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