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Jazzbaton Kaa Koi Kadr Nahi

Shivam Mishra

जज्बातों का कोई कद्र नही
इस बेरंगी सी दुनिया में
अब अर्ज करें क्या महफ़िल से
जब हम जैसों का कोई नहीं

किस्मत तो खुदा की लिखावट है
हम इस पर कैसे गौर करें
अब लिख ही दिया तक़दीरों में
तो देख - देख कर आंहें भरें

हम नील गगन के पंछी है
जाने क्यों हम बेरंगी है
हम आज परिंदा बन बैठे
लेकिन कल को बेगाने है

हम दर्द छिपाए बैठे है
इन अनजानी सी महफ़िल में
अपना ही नहीं कोई भी यहां
अब किससे अपना अर्ज़ करें

(C) Shivam Mishra
08/26/2020


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