आज वो मिला मुझे
उस अद्भुत प्रांगण में जहाँ
मर्यादा की सीमाओं में बंधे रहते हैं अंतर्मन
उस उन्मुक्त वातावरण में मौन संवाद
की ही गुंजाइश रही,
जो निश्चित समय के पश्चात समाप्त हो गई
समय था मध्याह्न भोजन का जिसमें समय
मिला मुझे उनके निश्छल नेत्रों से
हृदय दर्शन करने का
कुछ क्षण संवाद के पश्चात वियोग श्रृंगार ने
अपना प्रभाव दिखाया
पूरे वातावरण में फैली प्रेम की अद्भुत, अकथनीय
भाव का आभास कराया,
हमने भी मौन संवाद में ही मुलाकात करी,
नेत्रों ही नेत्रों में सैंकड़ों बात कही..