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मैं ज़िंदा हूँ, मैं ज़िंदा हूँ

Khushal Kumar Garg

"मैं ज़िंदा हूँ "

मैं ज़िंदा हूँ, मैं ज़िंदा हूँ,
मुझ में अभी साँस बाकी है,
पल भर का ही सही प्रयास बाकी है,
चेहरे सभी याद हैं, मुझे
जिन्हें बेनका़ब करना हैं ,
बहुत जुर्म सह लिए, अब हिसाब करना हैं
दर दर भटकता काम के लिए,
और उन्होने समझा कि मैं इक धंधा हूँ,
मैं ज़िंदा हूँ, मैं ज़िंदा हूँ।।१।।
मैं ज़िंदा हूँ, मैं ज़िंदा हूँ,
जब तक मुझ में जान बाकी है,
मुझे कुछ नहीं हो सकता,
जब तक ये झूठा जहान बाकी है,
वक्त-वक्त की बात है,
आज मैं मरा, तो कल तुझे मरना है
अब पाप का घडा भर चुका है,
अब ओर न सहना हैं,
मैं देख सकता था, तुम्हारी हर करतूत
ओर तुमने समझा कि मैं अंधा हूँ,
मैं ज़िंदा हूँ, मैं ज़िंदा हूँ,।।२।।

(C) Khushal Kumar Garg
05/05/2020


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