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खामखां

Gunjan Ganvir

खामखां ज़िन्दगी को कोसते रहे
उलझनें भी मेरी थी और गम भी मेरे थे
एक लम्हा खुशियों का ढूंढने चले थे
राहें भी मेरी थी और मंजिले भी मेरी थी

(C) Gunjan Ganvir
04/26/2020


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