धूप से तपती राहो पर ..

धूप से तपती राहों पर
मजदूरो क़ो चलते देखा ।
मुम्बई से पटना की दूरी ,
हमने पाँवो से नपते देखा ॥

धूप से तपती राहों पर
मजदूरो क़ो चलते देखा !

रेलों की पटरी पर पहले
रेलों क़ो चलते देखा था ।
उसी रेल की पटरी पर ,
सोए लोगों क़ो कटते देखा ॥

धूप से तपती राहों पर
मजदूरो क़ो चलते देखा ॥

रोटी के खातिर लोगों क़ो
परदेश तो जाते सुनता था ।
रोटी बिखेर कर सड़कों पर ,
उफ़ ! स्वर्ग -लोक जाते देखा ॥

धूप से तपती राहों पर
मजदूरो क़ो चलते देखा ॥

Prema Nand Tiwari
(C) All Rights Reserved. Poem Submitted on 05/14/2020 The copyright of the poems published here are belong to their poets. Internetpoem.com is a non-profit poetry portal. All information in here has been published only for educational and informational purposes.