Chikh

.चिख

कश्मीर में पढ़े लिखे युवाओं को दरिंदे बनते देखा है मैंने
कश्मीर की वादियों को आतंक की आग में जलते देखा है मैंने
कश्मीर की चिख से मैंने केरला की जमीनों पर दहशत सुलगती देखी है
अपने ही ख्वाब अपने पैरों तले कुचलते देखा है मैंने आपने क्या देखा है आज क्यों चुप हो
बड़ी-बड़ी बातें करते हो साहब
हां मैंने सुनी है चिखो को बंद दरवाजों में
इस अंधी भीड़ में दम घोटते
सपने बरसों से आंखों में पलते जा रहे हैं
साकार फिर भी कहा उन्हें कर पा रहे हैं
जुनून भी है कुब्बत भी है
मिट्टी के इन शरीरों में
मत मजबूर कर मुझे ए - पाकिस्तान
अगर कलम उठा ली
तो तेरा इतिहास लिख दूंगी
जाने कितने टूट कर बिखर गए घर
बिछड़ गए अपने पल भर में कितनों के अपने
फिर भी तेरी हर कोशिश नाकाम हो रही है
अब तो तेरी हस्ती भी मेरी हस्ती में गुमनाम हो रही है
पहचान के खातिर मैंने देश के बच्चो , युवाआें, बूढ़ों को पत्थर मारते देखा है
तुम क्या जानते हो
मेरे भारत के बारे में
मैंने तो‌ तेरे लोगों को भी तुझसे गद्दारी करते देखा हैं
तू मिसाल की नोक‌ पर भाषण देता है
जा जाकर देख
तेरे अपने ही तुझे धोखा दे रहे हैं
ए-पाकिस्तान तू भारत पर सवाल उठाता है
जा जाके देख अमेरिका मै आज तेरे एक ओर साथी को बम से उड़ाया है
मेरे देश के बलविरो ने
उसकी आखों मै खोफ़ देखा है
आखरी सांसो में डर से कापते देखा है मैने
आज मिला होगा सुकून मेरे पुलवामा के शहीदों को
जिन्होंने मेरे भारत देश की मिट्टी का रंग उस कुरुक्षेत्र
की धरती सा लाल कर दिया है अपने खून में
आज तेरे दो महान आंतकिओ को मौत के घाट उतारा है
उस बग़दादी और जेश की गुहार सुनके
बोख्ला सा गया है आज तेरा पाकिस्तान
वो चीख आज मेरे देश के कोने कोने में गूंज रही है
इस भारत मां की मिसाल तो तेरी पूर्वजों को भी याद होगी
जा जा कर पूछ उनसे
मेरे भारत की महान कहानी
गौर से सुनना जरा
मेरी इकलौते भारत की कहानी
ना जाने कितने आए शासक
खूब ज़ोर आज़माया
मगर टीक न पाए एक भी दशक
जिसके उत्तर में बरफ से ढके पहाड़ों की खूबसूरती झालर है
पश्चिम में फैली खेतो में दूर तलक
मखमल सी कोमल हरियाली है
पूर्व में रवि की किरने
नेह का दुलार है
दक्षिण जिसमे रातो के जुगनू की सी
चांद की उजली जाली की सर्वोपरि चादर बिछी है
ऐसा है मेरा देश का दिल
जहां प्रधानमंत्री युवाओं की प्रेरणा है
युवाओं की उम्मीदों की चिंगारी को
जब उत्साह की उड़ान मिलती है
तो वह कामयाबी की मिसाल बनकर आसमान में चमकने लगते हैं
पाकिस्तान तू क्या तोड़ेगा
मेरे भारत की संस्कृति
तेरी अपने ही लोग तड़पते नजर आ रहे
तेरे पाकिस्तान की धरती पर
नहीं मुझे कोई गम ना कोई शिकवा
जो कि पाकिस्तान की धरती भी भारत मां का हिस्सा हुआ करती थी
आज तेरे देश की औरतें तीन तलाक कीशिकार हुआ करती थी
न जाने कितने घर बिखरे होंगेतेरी इस कदम से
मगर मेरी भारत मां ने उन्हें रहने का आसरा दिया है
हां जानती हूं क्या गुजरी होगी तुझ पर
जब मेरे महान देश के सुपुत्रों मोदी शाह के प्रयास ने 370 का संविधान जम्मू कश्मीर में लागू किया होगा
थोड़ी नासाज है हालात
मगर कमजोर नहीं
जो मुसीबत देख कर भाग खड़े होंगे
यही ताकत है जो जीने का हौसला
मरने का जज्बा पैदा करती है
जय भारत
जय कलाम
जय मोदी शाह

Neha Singh
(C) All Rights Reserved. Poem Submitted on 11/22/2019 The copyright of the poems published here are belong to their poets. Internetpoem.com is a non-profit poetry portal. All information in here has been published only for educational and informational purposes.